शिवरात्रि–नन्दनी बर्थवाल नई दिल्ली

शिवरात्रि–नन्दनी बर्थवाल नई दिल्ली

नन्दनी बर्थवाल, नई दिल्ली-भारत वर्ष में फाल्गुन मॉस में मनाया जाने वाला त्योहार महाशिवरात्रि फरवरी मार्च मॉस में आता है। हिन्दू धर्म में यह त्योहार भगवान शिव को संबोधित किया जाता है। महाशिवरात्रि का अर्थ भगवान शिव की महान रात्रि है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चाँद के 13बी रात और 14बे दिन जब सर्दी ख़त्म होने पर आती है तब शिवरात्रि का पर्व आता है। हिन्दू धर्म के प्रचारक इस दिन पूजा अर्चना, योग, व्रत आदि से भगवान शिव की आराधना करते हैं।भगतजन रात भर उपासना कर शिव की पूजा करते हैं। शिव मंदिर जा कर शिवलिंग पर दुध और बेलपत्री चढ़ा कर भगवान शिव की आराधना करते हैं। शिवरात्रि के अवसर पर शिव मंदिरों को खूब सजाया जाता है, कश्मीर में इस पर्व को हर-रात्रि या हेराथ के नाम से मनाया जाता है।ज्यादातर हिन्दू त्योहार दिन में मनाए जाते हैं पर शिवरात्रि रात को भगवान शिव की महान रात के रुपमें मनाई जाती है।रात भर शिव मंदिरों में पूजा अर्चना की जाती है, जिसमे जागरण आदि भी किए जाते हैं, इसरात को दुःख आदि हरने की रात भी माना जाता है, फल, दूध, व्रत आदि के साथ ॐ नमः शिवाय मन्त्र का उच्चारण किया जाता है। महाशिवरात्रि का वर्णन स्कन्द पुराण, लिंग पुराण, पदमा पुराण में भी मिलता है। हर ग्रन्थ अपने तरिके से इसका वर्णन करता है पर सभी में व्रत का वर्णन जरूर मिलता है। शैव परम्परा के अनुसार इस रात को भगवान शिव ने रात भर स्वर्ग में नृत्य कर सृष्टि की रचना की थी , आज भी शैव परम्परा को मानने वाले रात भर नृत्य, उपवास, आराधना करते हैं। ऐसा भी माना जाता है आज की रात भगवान शिव की माँ पारवती के साथ शादी हुई थी। आज के दिन खजुराहो मंदिर में वार्षिक नृत्य का आयोजन किया जाता है जिसे नित्यंजली यानि भगति नृत्य कहा जाता है। गढ़वाल क्षेत्र में जागेश्वर धाम के मौके पर महामृत्युंजय मंदिर में आयोजित होने वाले विशेष पूजा अर्चना के बारे मे मान्यता है कि निसंतान महिलाएं द्वारा अगर पूजा अर्चना की जाए तो एक वर्ष में ही उनकी गोद भर जाती है। शिवरात्रि के दिन तपस्या कर भगवान शिव की पूजा अर्चना करने वाली महिलाओं को शिवरात्रि के दिन उपवास रखना होता है। जिसके बाद बह्मकुंड में स्नान और शाम की पूजा के बाद महिलाएं हाथ में गोबर और उसके ऊपर दिया रखकर रात भर खड़े रहकर भगबान शिव की आराधना की जाती है। अगले दिन सुबह पूजा के बाद पुजारी महिला के हाथ से दिए को उतारते हैं, जिसके पुनः बाद ब्रह्मकुंड में स्नान के बाद महिलाओं को मंदिर की साठी के चावल से शिवलिंग बनाकर शिवजी की पूजा करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया में महिलाओ को दिए में एक सुपारी , स्वर्ण प्रतिमा वा पिशोड़े में नारियल बांधना होता है। माना जाता हैकि इस तरह शिवरात्रि के अवसर पर पूजा अर्चना करने से एक साल बाद महिलाओं की सन्तान प्राप्ति होती है। भारत बर्ष ही नही नेपाल और दक्षणी एशिया में भी यह पर्व बड़े हर्षोलास के साथ मनाया जाता है।

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