Poem -Jai Prakash Tripathi

  Poem-Jai Parkash Tripathi, New Delhi हुई शाम मेरी सवेरे-सवेरे । कोई क्यों नहीं चल रहा साथ मेरे । चला था जहां से, वहीं का वहीं हूं, अकेले-अकेले मैं हूं…

नया साल 2017- मधु

नया साल 2017- मधु ..मयस्सर डोर से फिर एक मोती झड़ रहा है ..तारीखों के जीने से दिसम्बर उतर रहा है |….. कुछ चेहरे घटे , बढ़े गुजरी कहानियों में,…

माँ -ममता गैरोला

माँ -ममता गैरोला भगवान् का दूसरा रूप है माँ, उनके लिए दे देंगे जां, हमको मिलता जीवन उनसे, कदमो में है स्वर्ग बसा, संस्कार वह हमें सिखलाती, अच्छा-बुरा हमें बतलाती,…

Madhu Film writer

Madhu Film writer वो पुरुष आज़ाद ख्याल है मगर एक शर्त है, वो देता है आज़ादी महिलाओं को उड़ान भरने की वो देता है हौसला आकाश नापने की मगर एक…