कितनी भी हो जाऊ बड़ी “माँ!” मैं आज भी तेरा बच्ची हूँ–ममता गैरोला,भिवाड़ी राजस्थान

कितनी भी हो जाऊ बड़ी “माँ!” मैं आज भी तेरा बच्ची हूँ–ममता गैरोला,भिवाड़ी राजस्थान

घुटनों से रेंगते-रेंगते,

कब पैरों पर खड़ा हुई तेरी ममता की छाँव में,

जाने कब बड़ा हुई काला टीका दूध मलाई आज भी सब कुछ वैसा है,

मैं ही मैं हूँ हर जगह,

माँ प्यार ये तेरा कैसा है?

सीधी-साधी भोली-भाली मैं ही सबसे अच्छी हूँ,

कितनी भी हो जाऊ बड़ी “माँ!” मैं आज भी तेरा बच्ची हूँ

ममता गैरोला,भिवाड़ी राजस्थान

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