कौन हूँ मैँ………..अनु अत्रि

कौन हूँ मैँ………..अनु अत्रि

कौन हूँ मैं और क्या पहचान है

मेरी गुमनाम हूं मैं

,मुझे गुमनाम ही रहने दो

मुझे नहीं सुहाते हैं

ये आसमां में झिलमिलाते सितारे

मैं तो अँधेरा हूं

काली रात का अन्जान हूं

इस उजाले से मुझे अन्जान ही रहने दो

दुनिया की इस दुनियादारी से दूर

इन समझदारों की समझदारी से दूर

नादानों की बस्ती में मैं रहती हूं

मुझे नादान ही रहने दो

यह दिल मस्त हवाओं सा है

यह गम बहती घटाओं सा है

बह रहें हैं अपनी मस्ती में गर बहते हैं ,

इन्हें बहने दो

…अनु अत्रि,

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