“नीरू”निराली

मुकम्मल हो जाए इश्क मेरा थोड़ी सी वफा निभाए रखिए–!

आगोश में आऊँ मै बार-बार बाहों का घर बनाए रखिए–!

पलकों के अधूरे ख्वाबों को बेखुदी से सुलाए रखिए–!

अजनबी रास्ते सफर भी तन्हा आस का दीपक जलाए रखिए–!

बेशक मुहब्बत न हो मुझसे भ्रम मगर बनाए रखिए–!

सुना है तेरे शहर में अंधेरा बहुत है रौनके फिर आए इतना उसे रिझाए रखिए-!

मरने से पहले मरूँगी नही फिर भी कब्र में अरमा दफनाए रखिए–!

नीरू”निराली

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