नचिकेता के शब्द,जय परकाश त्रिपाठी , नई दिल्ली

नचिकेता के शब्द,जय परकाश त्रिपाठी , नई दिल्ली  क्या कहने इस खूबसूरत रचना के… प्यार नहीं रुक सकता भाई कभी किसी के रोके प्यार सुबह की नयी किरण है मुक्त…

दिल का सुकून –कल्पना खजुरिया , उधमपुर

दिल का सुकून –कल्पना खजुरिया , उधमपुर कौन छीन सकता है मेरे दिल का सुकुं, अपने ही गम देने का हुनर रखते हैं।। वो तो दिल की बदली पे भी…

ठाकुर का मानिंद –मधु

ठाकुर का मानिंद –मधु ठंडा ठंडा सूरज बहुत दिनों के बाद मिला है ज्यो प्याले से गुल शरबत छलका या झोले से जंतर मंतर जादू निकला है मारुती नंदन के…

“नीरू”निराली

मुकम्मल हो जाए इश्क मेरा थोड़ी सी वफा निभाए रखिए–! आगोश में आऊँ मै बार-बार बाहों का घर बनाए रखिए–! पलकों के अधूरे ख्वाबों को बेखुदी से सुलाए रखिए–! अजनबी…

देखो ये मानव कहाँ जा रहा है …कल्पना खजुरिया, उधमपुर जम्मू

देखो ये मानव कहाँ जा रहा है …कल्पना खजुरिया, उधमपुर जम्मू देखो ये मानव कहाँ जा रहा है अपनी ही मानवता ठुकरा रहा है। इसको विरासत में क्या क्या मिला…