जखिया गढ़वाल का जंगली जीरा…… नन्दनी बर्थवाल , नई दिल्ली

जखिया गढ़वाल का जंगली जीरा…… नन्दनी बर्थवाल , नई दिल्ली
गढ़वाल क्षेत्र में पाए जाने बाले पौधों में एक पौधा है जो गढ़वाल की हर रसोई में पाया जाता है यह पौधा है जखिय, जखिया जिसे जंगली सरसों भी कहा जाता है और गढ़वाल में इसे पहाड़ का जीरा भी कहा जाता है।बरसात के मौसम में हर जगह उगता देखा जा सक़ता है। गढ़वाल की हर रसोई में इसके बीज को तड़के में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी खुशबु तीखी होती है और हरसब्जि को लज़ीज़ बना देती है। जखिया गढ़वाल के खाने को पहाड़ का स्वाद दिलाता है। मैं कह सकती हूँ की बिना जखिया के गढ़वाल के खाने में पहाड़ का स्वाद नही आ सकता। पहाड़ में पाए जाने बाला यह बीज सरसों की तरह होता है जो सिर्फ आपको घर में ही मिल सकता है कहीं शहर या माल में नही यहाँ तक की गहवाल के शहरी बाजार में भी नही मिलेगा। यह पौधा लगभग पूरे बिश्व में उष्णपर्देशिय इलाकों में पाया जाता है जोकि ना सिर्फ एक मसाले की तरह ही इस्तेमाल किया जाता है बल्कि एक ओषधीय पौधे के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेद में जखिया का पंचांग इस्तेमाल किया जाता है। यह बुखार, खांसी, जलन, हैजा आदि बीमारियों के लिए एक रामबाण ओषधीय है, शायद इसी लिए हमारे पुरखों ने इसे रोज़ मर्रा कि ज़िन्दगी में एक मसाले के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया होगा। जखिया का सिर्फ बीज ही नही बल्कि इसके पत्ते को साग बना कर भी खाया जाता है। हाल ही में एक शोदपत्र पढ़ रही थी जो बता रहा था की जखिया के बीज का तेल दिमागी बिमारियों को ठीक करने में इस्तेमाल किया जाता है। गढ़वाल में अगर किसी को कभी चोट लग जाती है तो जखिया के पत्ते जख्म बरने के लिए एक first aid का काम करते हैं। जखिया कोई व्यवसायक् पौधा नही है खेत की मेंड़ पर ,सड़क के किनारे, जंगल में तथा खुले पढ़े मैदानों में उगता देखा जा सकता है। गगढ़वाल में एक प्रथा है जिस जगह पर जखिया नही पाया जाता तो पहाड़ के लोग इसे एक gift के रूप में अपने रिश्तेदारों तथा दोस्तों को देते हैं। आज इसकी बढ़ती माँग की बजह से किसान इसकी खेती के बारे में भी सोच रहे हैं। गढ़वाल में जखिया के बीज को बरसात के बाद इकट्ठा किया जाता है और फिर घूप में सूखा कर पूरे बर्ष इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कुछ बैघनिकों का मानना है यह बीज boidiesel के रूप में भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। जखिया जिसका बॉघनिक नाम Cleome viscoa है यह 500 से 1500 मीटर तक ऊंचाई बाले क्षेत्र में पाया जाता है। अभी तक इसको बैघनिक तरिके से एक फल के रूप में उगाने के बहुत कम प्रयास किए गए हैं मगर देखा गया है अगर जखिया को एक फसल के रूप में उगाया जाए तो यह एक लाभदायक फसल साबित हो सकती है। जखिया को बहुत से इलाकों में एक खरपतवार माना जाता है पर गढ़वाल में यह एक आय का साधन भी बन सकता है अगर इसे एक व्यवसायिक फसल के रूप में कृषि में लाया जाए। जखिया जिसे asian spider flower भी कहा जाता है एक मीटर तक ऊँचा होता है जो capparidaceae परिवार का बरसात में उगने बाला पौधा है। पीले फूल बाले इस पोधे के तने पर बहुत बारीक बाल होते हैं 3 से 5 छोटे छोटे पत्ते मिल कर एक पत्ता बनाते हैं। बीज सरसों के बीज के समान गोल और उसी रंग के होते हैं। जखिया अगर यूँ कहा जाए की गढ़वाल के खाने की अलग से एक पहचान है तो गलत नही होगा। आज यहां यहां गढ़वाल के लोग बसे हैं वहाँ वहाँ जखिया मिल जाएगा। यहां तक की गढ़वाल के chef आज बड़े बड़े होटल में भी जखिया से बने खाने को परोसते हैं। हालांकि यह बरसात के दिनों में बहुत सी जगह एक खरपतवार के रूप में उगता देखा जाटा है पर अगर इसे एक व्यवसायिक फसल के रूप में उगाया जाए तो गाँव से शहर की तरफ हो रहे पलायन को काफी हद तक रोका जासकता है।

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