मतदान…..,,Madhu

मतदान……Madhu

विश्व् के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में “मतदान” किसी आहुति या वज़ू से कम नही । देश का हर जागरूक नागरिक बूथ कैपचरिंग नेताओं की खरीदफरोख्त, पेड मीडिया के भ्रामक एग्जिट पोल ,शराब और रूपए में अशिक्षित वोटर्स को खरीदने, धार्मिक उन्माद फैलाने और वोटों के स्पष्ट ध्रुवीकरण के लिए भड़काऊ भाषण जैसी घटनाओं से बेहद चिंतित है । लोकतंत्र का पावन मंदिर हमारी “लोकसभा ” भी लहराती गड्डियों और पोर्न वीडियो वाले जनप्रतिनिधियों का साक्षी बनी ।जेल के भीतर से चुनाव की दशा और दिशा तय करने वाले गुंडे भी अनगिनत बार देखे ।
ये सारी अराजकता एक पलड़े पर और देश का मतदाता दूसरे पलड़े में।यकीन मानिए गरीबी, अशिक्षा,बेरोजगारी के बाद भी देश के मतदाता ने जो नही छोड़ा है वह है “लोकतंत्र में विश्वास” । हर बार “धनबल” के आगे “जनबल” की जीत हुई । हारे हुए प्रत्याशी सदा ही कहते आए कि धनबल की जीत हुई मगर सच यह है कि मतदाता कई दफा दो में किसी एक से सहमत न होकर भी “नोटा” दबाने के बजाए सत्ताधारी से असंतुष्ट होने की वज़ह से आक्रोश में दूसरे पक्ष को वोट करता है । इस नकारात्मक वोटिंग की प्रथा को राजनैतिक दल बहुत अच्छे से समझते है ।”खो-खो” की तर्ज़ पर आवाम के गुस्से का फायदा विपक्षी दल और सत्ताधारी को बारी बारी मिलता रहता है ।
2014 के लोकसभा के बाद के अलग अलग राज्यों के चुनाव के नतीजे अलग अलग पार्टी के पक्ष में गए ।परिणाम के बाद राजनैतिक दलों की समीक्षा बैठकों में “हार के कारणों” पर विवेचना होती है । हैलीकाप्टर से पैराशूट लैंडिंग कर भीड़ के बीच 15 मिनिट का भाषण दे फिर दूसरी चुनावी सभा के लिए उड़ जाने वाले नेता ज़मी से जुड़ी आधारभूत समस्याओं से जुड़कर “पराजय” पर ईमानदार आत्ममंथन कर पाएंगे ??? तमाम फ़िल्मी सितारे, क्रिकेटर, सेलिब्रिटी फूल मेकअप में हाथ हिलाते रोड शो करते है । ये ग्लैमरस चेहरे लम्हा भर मतदाताओं को लुभा , पार्टी फंड से अपना मेहनताना करोड़ों में वसूल अगले चुनाव तक महानगरों की “पेज़ थ्री पार्टीज़” में पाँच साल के लिए लौट जाते है । अभी तीन राज्यों गोवा, पंजाब और उत्तरप्रदेश में तीन दिन बाद से ही सिलसिलेवार मतदान आरम्भ हो रहा है । धर्म,जाति, मजहब ,सम्प्रदाय से हट कर “देशहित” में रिकार्ड तोड़ वोटिंग करिये और “स्वार्थी मतदाता” बनिए । याद रखिए किसी भी पार्टी के पारम्परिक या खरीदे मतदाता न बने ।नेताओं में ख़ौफ़ होना चाहिए कि मतदाता मानसिक विकलांग नही है ।वो जब चाहे हमें पदच्युत कर सकती है । हम असहाय देखते रह जाते है हमारे पैसों से सपरिवार ऐश उड़ाते नेताओं के जलवे । महज चन्द सालों में ये नेता करोडों की सम्पत्ति के आसामी कैसे बन जाते है??अगर वो दलबदलू नेता है तो हम देशहित में दलबदलू मतदाता है ।इन तीन राज्यों में परिणाम चाहे किसी भी पार्टी के पक्ष में आये जनता के राजनैतिक झुकाव को सभी दलों को नत मस्तक हो 2019 के लोकसभा के पूर्व देश का रुझान या एक सटीक एग्जिट पोल मानना ही होगा ।
Madhu writer at film writer’s association Mumbai

150 Comments

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *