ठाकुर का मानिंद –मधु

ठाकुर का मानिंद –मधु ठंडा ठंडा सूरज बहुत दिनों के बाद मिला है ज्यो प्याले से गुल शरबत छलका या झोले से जंतर मंतर जादू निकला है मारुती नंदन के…

“नीरू”निराली

मुकम्मल हो जाए इश्क मेरा थोड़ी सी वफा निभाए रखिए–! आगोश में आऊँ मै बार-बार बाहों का घर बनाए रखिए–! पलकों के अधूरे ख्वाबों को बेखुदी से सुलाए रखिए–! अजनबी…