वैद्य संभाजी पाटील

…. ।।गुरुॐ।। … तुम वर्षा पश्चिम घाट की मैं विरान मरुस्थल प्रिये तुम वसंत की बहार मैं अंगार ग्रीष्म प्रिये तू श्वेत पलाश हो दुर्लभ मैं रास्ते का शरपुंखा प्रिये…

कौन हूँ मैँ………..अनु अत्रि

कौन हूँ मैँ………..अनु अत्रि कौन हूँ मैं और क्या पहचान है मेरी गुमनाम हूं मैं ,मुझे गुमनाम ही रहने दो मुझे नहीं सुहाते हैं ये आसमां में झिलमिलाते सितारे मैं…

चिट्ठी–प्राणप्यारी के नाम– वरुण वीर , उधमपुर, जम्मू

◆◆◆◆◆चिट्ठी◆◆◆◆◆ ◆◆प्राणप्यारी के नाम◆◆ वरुण वीर , उधमपुर, जम्मू ___________________________ मैं कई दिनों से कहानियाँ ही लिख रहा हूँ । खुद को इस भीड़ में फैले अकेलेपन् से बचाने के…

तेरा डर –वरुण वीर,उधमपुर जम्मू

◆◆◆◆ तेरा डर ◆◆◆◆ वरुण वीर,उधमपुर जम्मू कभी कभी किसी गलतफहमी के शिकार में उलझ जाते हैं हम दोनों । यह जो चेहरे पर तेरे बेरुखी सी दिखती है असल…

माँ–अनु अत्रि

माँ–अनु अत्रि पुच्छेआ इक दिन मैं माँ कोह्ला तू जो गल्ल करें बचपनै दी कुत्थें न ओह् मिट्टी दे टेह्ले कुत्थें न ओह् बच्चें दे रेले कुत्थें न अम्बै ने…