मखाने–नन्दनी बर्थवाल, नई दिल्ली

मखाने–नन्दनी बर्थवाल, नई दिल्लीः    नवरात्रे के अवसर पर खाए जाने वाले जिसे Gorgon nut भी कहा जाता है ज्यादातर सूखे हुए मिलेते हैं। जिन्हें कच्चा या पकाकर खाया जाता है। मखाने व्रत के समय के लिए बहुत पौष्टिक आहार है। कमल फूल के बीज को भारत बर्ष में मखाने कहा जाता है। कमल बीज प्रोटीन, विटामिन तथा मिनरल का भरपूर मिश्रण है। 100 ग्राम मखाने से 350 कैलरी तथा 63 से 68 ग्राम कार्बोहायड्रेट, 17 से 18 ग्राम प्रोटीन, 1.9 से 2.5 ग्राम वसा प्राप्त होता है। मखाने में जरूरी मिनरल भरपूर मात्रा में पाए जाते जैसे कम cholestrol, कम शुगर ,सोडियम तथा saturated वसा आदि पाए जाते हैं। मखाने को pop corn तथा स्नैक्स भी बनाया जा सकता है। इसकी खेती सिर्फ बिहार के मिथिलांचल में होती है मखाना को देवताओं का भोजन कहा गया है । उपवास में इसका विशेष रूप से उपयोग होता है । पूजा एवं हवन में भी यह काम आता है । इसे आर्गेनिक हर्बल भी कहते हैं । क्योंकि यह बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशी के उपयोग के उगाया जाता है । अधिकांशतः ताकत के लिए दवाये मखाने से बनायी जाती हैं।केवल मखाना दवा के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता .इसलिए इसे सहयोगी आयुर्वेदिक औषधि भी कहते हैं।
मखाना की खेती भारत के अलावा चीन, जापान, कोरिया और रूस में भी की जाती है. इसका फल स्पंजी होता है. फल को बेरी कहते हैं. फल और बीज दोनों खाये जाते हैं. फल में 8-20 तक बीज लगते हैं. बीज मटर के दाने के बराबर आकार के होते हैं और इनका कवच कठोर होता है। 65 प्रतिशत मखाना बिहार में उगाया जाता है. इसे आर्गेनिक हर्बल भी कहते हैं, क्योंकि यह बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशी के उपयोग के उगाया जाता है. औषधीय गुणों के चलते इसे क्लास वन फूड का दरजा दिया गया है. इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होने से यह काफी लाभप्रद है. यह ब्लड प्रेशर एवं कमर तथा घुटनों के दर्द को नियंत्रित करता है. इसके बीजों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड, वसा, कैल्शियम एवं फास्फोरस लौह एवं विटामिन बी-1 भी पाया जाता है. मणिपुर के कुछ इलाकों में इसके जड़कंद और पत्ती के डंठल की सब्जी भी बनाते हैं।
मखानों की पालिश : लाई बनने पर उनकी पॉलिश और छंटाई की जाती है । इस हेतु इन्हें बांस की टोकरियों में रखकर रगड़ा जाता है । इस प्रकार इनके ऊपर लगा कत्थई-लाल रंग का छिलका हट जाता है । यही पॉलिशिंग चावल को भी सफेद बनाने के लिए मशीनों से उन्हें पालिश करते हैं । हालांकि ऐसा करने से उसके कई पोषक तत्व हट जाते हैं । पॉलिश करने पर मिले सफेद मखानों को उनके आकार के अनुसार दो-तीन श्रेणियों में छांट लिया जाता है। फिर उन्हें पोलीथीन की पर्त लगे गनी बैग में भर दिया जाता है । ये इतने हल्के होते हैं कि एक बोरे में मात्र 8-9 किलो मखाने समाते हैं । दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना शोध संस्थान के अनुसार भारत में लगभग 13,000 हैक्टर नमभूमि में मखानों की खेती होती है । यहां लगभग नब्बे हजार टन बीज पैदा होता है । देश का 80 प्रतिशत मखाना बिहार की नमभूमि से आता है । इसके अलावा इसकी छिटपुट खेती अलवर, पश्चिम बंगाल, असम, उड़ीसा, जम्मू-कश्मीर, मणीपुर और मध्यप्रदेश में भी की जाती है। परन्तु देश में तेजी से खत्म हो रही नमभूमि ने इसकी खेती और भविष्य में उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं । यदि स्वादिष्ट स्वास्थ्यवर्धक मखाना खाते रहना है तो देश की नमभूमियों को भी बचाना होगा । नमभूमियों को प्रकृति के गुर्दे भी कहते हैं और पता चलता है कि यहां उगा मखाना हमारी किडनियों की भी रक्षा करता है ।
मखाना के आयुर्वेदिक गुण : पाचन में सुधार करे :- मखाना एक एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण, सभी आयु वर्ग के लोगों द्वारा आसानी से पच जाता है। बच्चों से लेकर बूढे लोग भी इसे आसानी से पचा लेते हैं। इसका पाचन आसान है इसलिए इसे सुपाच्य कह सकते हैं। इसके अलावा फूल मखाने में एस्ट्रीजन गुण भी होते हैं जिससे यह दस्त से राहत देता है और भूख में सुधार करने के लिए मदद करता है। एंटी-एजिंग
गुणों से भरपूर :- मखाना उम्र के असर को भी बेअसर होता है। यह नट्स एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण उम्र लॉक सिस्टम के रूप में काम करता है और आपको बहुत लंबे समय तक जवां बनाता है। मखाना प्रीमेच्योर एजिंग, प्रीमेच्योर वाइट हेयर, झुर्रियों और एजिंग के अन्य लक्षणों के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद :- डायबिटीज चयापचय विकार है, जो उच्च रक्त शर्करा के स्तर के साथ होता है। इससे इंसुलिन हार्मोंन का स्राव करने वाले अग्न्याशय के कार्य में बाधा उत्पन्न होती है। लेकिन मखाने मीठा और खट्टा बीज होता है। और इसके बीज में स्टार्च और प्रोटीन होने के कारण यह डायबिटीज के लिए बहुत अच्छा होता है।
किडनी को मजबूत बनाये :- मखाने का सेवल किडनी और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है। फूल मखाने में मीठा बहुत कम होने के कारण यह स्प्लीन को डिटॉक्सीफाइ करने, किडनी को मजबूत बनाने और ब्लड का पोषण करने में मदद करता है। साथ ही मखानों का नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और हमारा शरीर सेहतमंद रहता है।
दर्द से छुटकारा दिलाये :- मखाना कैल्शियम से भरपूर होता है इसलिए जोड़ों के दर्द, विशेषकर अर्थराइटिस के मरीजों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर के किसी भी अंग में हो रहे दर्द जैसे से कमर दर्द और घुटने में हो रहे दर्द से आसानी से राहत मिलती है।
नींद न आने की समस्या से छुटकारा :- मखाने के सेवन से तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है। रात में सोते समय दूध के साथ मखाने का सेवन करने से नींद न आने की समस्या दूर हो जाती है।
कमजोरी दूर करना :- मखानों का नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और हमारा शरीर सेहतमंद रहता है। मखाने में मौजूद प्रोटीन के कारण यह मसल्स बनाने और फिट रखने में मदद करता है। मखाना शरीर के अंग सुन्न होने से बचाता है तथा घुटनों और कमर में दर्द पैदा होने से रोकता है। प्रेगनेंट महिलाओं और प्रेगनेंसी के बाद कमजोरी महसूस करने वाली महिलाओं को मखाना खाना चाहिये। मखाना का सेवन करने से शरीर के किसी भी अंग में हो रही दर्द से राहत मिलती है। मखाना का सेवन करने से शरीर में हो रही जलन से भी राहत
मिलती है। मखाना को दूध में मिलाकर खाने से दाह (जलन) में आराम मिलता है। ६-मखानों के सेवन से दुर्बलता मिटती है तथा शरीर पुष्ट होता है।

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