पहला पहला बौर आम का—-Madhu

….पहला पहला बौर आम का–Madhu
….सन्देश गतिमय “ऋतू चक्र” के नाम का …पहला पहला बौर आम का
….खिली नर्म किरणे विदा ले रही
….सूरज टिकने लगा देर शाम का …पहला पहला बौर आम का
…जा रहा पल्लवित मधुमास सुहाना
…..आने को दिन तपती कड़ी घाम का ….पहला पहला बौर आम का
….खेतों में पकी फसले अब चटकी
…बढ़ा बोझ किसानी काम का …पहला पहला बौर आम का
….कटनी औजार छज्जे से उतरे और
…. फ़िक्र खलिहान के इंतजाम का …पहला पहला बौर आम का
…..चौपालों पर फागुनी ढोल नगाड़े
….आने को त्यौहार रंगीले राधा श्याम का …पहला पहला बौर आम का
…..ऊबी दोपहरिया अमराई में कोयल कूके
…. चाँद हर लेता ताप सारे घाम का…पहला पहला बौर आम का
…..लगन ,पत्रा, मुहर्त खुले शहनाई के
…जजमान हुए दर्शन चारों धाम का …पहला पहला बौर आम का
….इस जेठ ब्याही जाए उस जानकी को
…साथ मिले मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का …
….. पहला पहला बौर आम का …..
…सन्देश गतिमय ऋतुचक्र के नाम का
(कविता शेयर करने मेरी अनुमति की आवश्यकता नही है )
MADHU_writer at film writer,s association MUMBAI

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