वृंदावन में अनूठी शुरुवात –Madhu

वृंदावन में अनूठी शुरुवात –Madhu

भारतीय समाज में “वैधव्य ” की पीड़ा झेलती महिलाओं को जीवन के सभी उत्सवधर्मी रंगों से दूर कर दिया जाता है । जीवनसाथी की मृत्यु की पीड़ा और मानसिक अवसाद से गुजरती इन एकाकी महिलाओं पर सामाजिक कुरीतियां की मार जले पे नमक छिड़कने का काम करती है । कृष्ण की नगरी “वृन्दावन ” का होली आयोजन देश ही नही विदेशी मेहमानो के लिए भी आकर्षण का केंद्र होता है । भिन्न भिन्न तरीकों की होली | फूलो वाली होली , लट्ठ मार होली , गुलाल की होली ,रंगो की होली इस तरह छह दिनों तक धूमधाम से उत्सव के रंग में डूबे लोगो को ये कातर विधवा आँखे मूक दर्शक बन देखती थी । लेकिन समाज सेवी संस्था “सुलभ इंटरनेशल ” की पहल पे इस तरह से एकाकी, रंगहीन ,नैराश्य जीवन जीती इन बहिष्कृत माताओं को वृन्दावन होली उत्सव में शामिल करने की पहल का स्वागत । इसे कहते है अपने धर्म से प्रेम । दूसरे धर्मो को नीचा दिखाने से बेहतर है अपने धर्म की कुरीतियों को दूर करने के प्रयास । सभी धर्मो में स्त्रियों की दशा सुधारने और प्रचलित कुरीतियों को दूर कर उन्हें मुख्य धारा में सम्मिलित करने ऐसे सार्थक प्रयास होने चाहिए। खूब खेलों होली अम्मा |तुम्हारा अधिकार है तुम्हे हक है रंगों में सरोबार होने का |
” साँसे चलती रही और जिन्दगी भी न हो
क़त्ल से बड़कर ये गुनाह कही भी न हो “

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *