Baadal—Bhani Rai

Baadal—Bhani Rai

मस्जिद पे गिरता है
मंदिर पे भी बरसता है..
ए बादल बता तेरा मजहब कौनसा है……..।।

इमाम की तू प्यास बुझाए
पुजारी की भी तृष्णा मिटाए..
ए पानी बता तेरा मजहब कोन सा है…. ।।

मज़ारो की शान बढाता है
मुर्तीयों को भी सजाता है..
ए फूल बता तेरा मजहब कौनसा है……..।।

सारे जहाँ को रोशन करता है
सृष्टी को उजाला देता है..
ए सुरज बता तेरा मजहब कौनसा है………।।

मुस्लिम तूझ पे कब्र बनाता है
हिंदू आखिर तूझ में ही विलीन होता है..
ए मिट्टी बता तेरा मजहब कौनसा है……।।

ऐ दोस्त मजहब से दूर हटकर, इंसान बनो
क्योंकि इंसानियत का कोई मजहब नहीं होता…

Bhani Rai is a student of B.Sc.Forestry of Garhwal University. She is from Jammu, J&K

1 Comment

  1. So true
    Her koi her ek baat me her ek kaam k liye majhab ko Delta hai chaahe wo ek election ho ya kahi koi selection ho
    Her ek majhab se upar ek majhab hai pyar bhaichare ka aur insaniyat ka jise hum bhool chuke hain
    Keep it up n keep writing such good lines

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *