धूप बड़ी तेज है–Jai Prakash Tripathy, New Delhi

धूप बड़ी तेज है–Jai Prakash Tripathy, New Delhi

सूरज के सिरहाने बैठा अंगरेज है, धूप बड़ी तेज है, धूप बड़ी तेज है।
चालू-पुरजे, हरफन मौले चारो तरफ,
हौले-हौले मौसम खौले चारो तरफ,
होंठ हवा के फटना हैरतअंगेज है।
पांव देख-देख किये मन उदास मोरनी,
टुकर-टुकर ताक रही प्यासी कठफोरनी,
बूंद-बूंद का किस्सा फिर वहशतखेज है, धूप बड़ी तेज है, धूप बड़ी तेज है।
ताप-ताप चीख एक-सी इसकी-उसकी,
आंख-आंख दरिया, आंसू-आंसू सिसकी,
पानी-पानी मन पर सहरा की सेज है, धूप बड़ी तेज है, धूप बड़ी तेज है।
ऐसी लू-लपट चली चट्टी-दर-चट्टी
अपनी ही आंच-आंच पिघल गयी भट्ठी
ठूंठ खड़ी चिमनी को धुएं से गुरेज है, धूप बड़ी तेज है, धूप बड़ी तेज है।
छांव-छांव बरगद ने चाल चली गहरी
डाल-डाल, पात-पात सज गयी कचहरी
सोने की कुर्सी है, चांदी की मेज है, धूप बड़ी तेज है, धूप बड़ी तेज है।

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