अमरनाथ यात्रा,राकेश वर्मा , जम्मू

अमरनाथ यात्रा,राकेश वर्मा , जम्मू

जम्मू कश्मीर राज्य में 12756 फ़ीट की ऊंचाई पर सिथत है श्री अमरनाथ बाबा की गुफा जिसे बाबा बर्फानी के नाम से भी जाना है। श्रीनगर से 141 किलोमीटर दूर इस गुफा में पहलगाम तथा बालटाल के रास्ते पहुँचा जा सकता है। यह गुफा लगभग पूरा साल बर्फ से ढकी रहती है जो गर्मी के मौसम में बहुत कम समय के लिए यात्रा के दौरान खुलती है। देश विदेश से श्रद्धालु यहाँ आकर बर्फ से बने शिवलिंग के दर्शन करते हैं। अमरनाथ गुफा का बर्णन बहुत पौराणिक ग्रन्थों में किया गया है। 300 BCE में एक शाशक आर्यराजा का बर्णन किया गया है , कहा जाता है राजा आर्यराजा बर्फ से बने शिवलींग की पूजा किया करते थे। राजतरंगिणी में भी अमरनाथ का ज़िक्र पढ़ा जा सकता है। ऐसा कहा जाता है सदियों पहले माँ पार्वती ने भोले नाथ से एक प्रशन किया कि स्वामी आप हमेशा गले में मुंड माला क्यों पहने रहते हो , भोले शंकर ने जवाब दिया जब जब तेरा जन्म हुआ मैंने इस माला में एक सर जोड़ दिया और यह मुंड माला हमेशा मेरे गले में रही। तभी माँ पार्वती ने कहा हे भोले नाथ मैंने तो हर जन्म इस शरीर का त्याग किया और मैं बार बार आपके लिए जन्म लेती रही पर आप तो अमर हो …. मुझे इस बारे में जानना है तब भोले नाथ ने जवाब या यह सब एक अमर कथा की वजह से है। माँ पार्वती ने तब ज़िद्द की और उस अमर कथा को सुनाने के लिए कहा। भगवान शिव बहुत समय तक माँ पार्वती को यूँ ही बहलाते रहे पर माँ पार्वती की ज़िद्द पर एक दिन भोले नाथ यह कथा सुनाने को त्यार हो गए। भोले बाबा ने ऐसी जगह कि तलाश की जहाँ कोई जीवित प्राणी ना पाया जाए इसके लिए उन्होंने अपने नन्दी को पहलगांव (बैल गाँव) छोड़ दिया, अपनी जटाओं से चन्द्रमा को चंदरवारी छोड़ दिया, शेषनाग झील के किनारे अपने साँप छोड़े, तब उन्होंने फैसला किया कि उनका बेटा श्री गणेश महागणेश पर्वत पर रहेगा। और आखिर में भोले शंकर जी ने पञ्जतार्नि में जमीन, पानी, हवा, आग तथा आसमान को छोड़ा और कहा गया की उन्होंने सांसारिक सब वस्तुओं का त्याग करने के बाद माँ पार्वती के साथ तांडव नृत्य किया। यह सब त्याग करने के बाद भोले नाथ माँ पार्वती को लेकर अमरनाथ की गुफा की तरफ रवाना हो गए। भोले नाथ ने तब स्मादि ली और यह बात पक्की की कोई भी जीवित प्राणी इस कथा को ना सुन सके। फिर भोले नाथ ने रूद्र को पैदा किया और हुकुम दिया की गुफा के चरों और आग जलाई जाए ताकि कोई भी जीवित ना रह सके इस अग्नि को कालाग्नि कहा गया। इसके बाद भोले नाथ ने माँ पार्वती को अमर कथा सुनानी शुरू की पर जिस हिरण की खाल पर भोले नाथ बैठ कर इस अमर कथा का वर्णन कर रहे थे उसके नीचे एक अंडा सुरक्षित रह गया, ऐसा माना गया यह अंडा निर्जीव है और यह भगवान शिव और माँ पार्वती के आसन की वजह से भी सुरक्षित रह गया। इस अंडे से कबूतर का एक जोड़ा पैदा हुआ जो इस अमर कथा को सुन कर अमर हो गया। आज भी जब श्रद्धालु सच्चे मन से बाबा बर्फानी के दर्शन करने जब जाते हैं तो इस कबूतर के जोड़े के भी दर्शन करते हैं। ऐसा कहा जाता है बूटा मलिक नाम का एक गुज्जर को एक बार किसी साधू ने एक झोला दिया जो बूटा मलिक ने जब घर जा कर खोला और देखा वह सोने के सिक्कों से बरा हुआ था। बूटा मलिक जब उस स्थान पर साधू का शुक्रिया करने पहुंचा तो देखा वहाँ से साधू जा चूका था और वहाँ एक गुफा है जिसमें एक बर्फ का शिवलिंग बना हुआ है। गांव में वापस आने पर बूटा मलिक ने गुफा के बारे में सबको बताया और तब से श्रद्धलु इस पवित्र गुफा में बर्फ से बने शिवलिंग के दर्शन करने आते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार कश्मीर की वाधि एक झील हुआ करती थी जिसका पानी कश्यप ऋषि ने नदियों तथा नालों से हिमालय से बाहर निकाला। उस समय भृगु ऋषि हिमालय से होते हुए इस रास्ते से गुजर रहे थे तब उन्होंने शिवलिंग को देखा और तब से लाखों श्रदालु इस मुश्किल भरे रस्ते से हो कर भोले बर्फानी के दर्शन करने आते हैं। आज यात्रा के दौरान स्वयं सेवी संस्थाओं ने जगह जगह लंगर लगाए होते हैं इनमें यात्रियों के ठहरने की भी व्यवस्था रहती है।
राकेश वर्मा , जम्मू

140 Comments

  1. When I originally commented I clicked the “Notify me when new comments are added” checkbox and now each time
    a comment is added I get three e-mails with the same comment.
    Is there any way you can remove people from that service? Bless you!

Leave a Reply to Jargede Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *