बचपन का 15 अगस्त– मधु

बचपन का 15 अगस्त– मधु

स्कूल के दिनों में मैँ दावे के साथ कह सकती हूँ के पूरे साल में सिर्फ तीन दिन होते थे जब मैं सुबह मम्मी के बिना उठाये फुर्ती से बिस्तर छोड़ देती थी | ..वो तीन दिन थे 15 अगस्त , 26 जनवरी और स्कूल पिकनिक वाला दिन | इन दो “राष्ट्रीय पर्व” की पहली रात कैनवास के सफ़ेद जूते धुले, पालिश हुए चमकते थे | ऐसी तैयारी और उत्साह सुबह से कि पूछो मत | मोहल्ले के आस पास के घरों से सुबह सुबह झंडे के लिए फूल माँगना , न मिले तो बाउंड्री वाल पर चुप चढ़ चोरी करना | स्कूल जाते वक़्त रास्ते भर अलग अलग स्कूलों के यूनिफार्म में सजे धजे ,हाथो में फूल लिए बच्चों का झुण्ड | राष्ट्रीय पर्व के दिन सभी बच्चों की टाइमिंग एक ही वक़्त यानि “सुबह” का समय होने की वज़ह से सड़के बच्चों से गुलजार होती है | इतनी सुबह ताज़गी में भरे लोग देखकर लगता कि हर आदमी स्वंत्रता पर्व मनाने आज घर से बाहर है । कुछ लोग प्रभात फेरी में देशभक्ति गीत गाते , नारे लगाते मिलते । सड़क के दोनों किनारों पर कही चूना पावडर से सीमांकन, कही ध्वजारोहन की तैयारी, कही झंडे बिकते रहते । नुक्कड़, गली ,चौराहों दफ्तरों के सामने रिक्शे से बूंदी लड्डुओं से भरे बोर उतारते लोग |

हर गली ,चौराहे, नुक्कड़ से जोर जोर का लाउड स्पीकर में देशभक्ति गीत . .मेरे देश की धरती सोना उगले ,उगले हीरे मोती ..मेरा रंग दे बसंती चोला ए वतन, ए वतन हमको तेरी कसम तेरी राहो पे…. | बस आगे बढ़ते जाओ और हर अगले चौक पर गीत के बोल बदलते जाते थे | पता नही क्यू ये इकलौता गीत है जो एक बार अगर सुबह सुबह सुन लो तो अनचाहे ही मेरी जुबान पर रात तक लगातार चलता था दिल दिया है जां भी देंगे ए वतन तेरे लिए .| पूरे देश ने जो आदेश “लता जी” का दिल से माना है , वो है .. ए मेरे वतन के लोगो ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए उनकी. .इस गीत के बोल और लताजी की आवाज़ के दर्द को हर हिन्दुस्तानी शिद्दत से महसूस करता है |इस गीत को भरी महफिल में भी सुनो लो फिर तो आंसू छुपाना मुश्किल हो जाता है |
..सड़कों पर राष्ट्रीय त्यौहार की तिरंगी छटा , सार्वजनिक मंचों पर नृत्य प्रस्तुति देने जा रहे बच्चें अलग अलग प्रान्तों की वेशभूषा में सजे धजे स्कूटर के पीछे ,रिक्शों और बसों में जाते दिखते । स्कूल जाने के रास्ते में ये भारत माँ के इस गौरवपर्व की तिरंगी छटा अपनी आँखों में ठसाठस भरते हुए प्यारे से स्कूल पहुँचते थे | स्कूल की चहल पहल में आज के दिन क्लास मे जाने की कोई जल्दी नही | टीचर सहित बच्चे व्यस्त होते थे झंडे के चारो ओर जमीन में फूलो की रंगोली बनाने, तिरंगे चिपकाने , मुख्य द्वार सजाने में |सबसे मजेदार स्कूल जाओ बिना बैग और पढ़ाई का माहौल न हो | त्यौहार की अफरा तफरी में स्कूल के कारीडोर पर , दूसरी क्लासेस में बेधड़क आवारगी | खूंखार टीचर्स को आज के दिन सहज हास परिहास करता देख अजीब लगता था | सामान्य दिनों जिन टीचर्स के सामने हमारी बोलती बंद होती थी आज के दिन बराबरी से हलके फुल्के माहौल मे तैयारियों में साथ देते थे |
टीचर के इतने निकट जाने पर बिजली के तार को छू आने का रोमांच होता | हमारे स्कूल में भी सुबह से जोरदार स्पीकर में लता जी का गीत सुन फिर एक बार आँखे नम हो जाती। “जब देश में थी दिवाली वो खेल रहे थे होली , जब हम बैठे थे घरो में वो झेल रहे थे गोली | “.. .कार्यक्रम की शुरुवात के लिए स्पोर्ट्स टीचर की फुर्रफुर्र की सिटी बजती । इस ध्वन्यात्मक आदेश पर सभी छात्र छात्राए ग्राउंड में पंक्तिबद्ध खड़े होते ध्वजारोहण के लिए | जिन बच्चो के लाये “फूल” झंडे मे बंधे होते उन्हें भारत रत्न से सम्मानित होने का सौभाग्य प्राप्त होता | बाकी के फूल झंडे के नीचे की रंगोली की शोभा बढ़ा रहे होते | पता नही राष्ट्रगान के अंत में लगने वाले नारे ..भाआआआआरत माता की जय ..,….वन्न्न्नन्न्दे मातरम् ……इन्कलाब जिंदाबाद… के जयकारों की आवाज़ भीतर दिल की सघन गहराइयों से पूरी आवाज़ में आती थी | ऊँचाई पर पूरी शान से लहराते तिरंगे की शान का दृश्य कभी सीने में गर्व तो कभी आँखों में पानी ले आता है । स्कूल से लौटते वक़्त भी अलग अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे भाग ले चुके बच्चे स्कूटर में थके मांदे , ,फीके पड़ चुके मेकअप मे पैकेट से बूंदी फाँकते दिखते | कुछ लोग स्कूल से ही पुलिस ग्राउंड के कार्यक्रम देखने निकल जाते ।

सच इस त्यौहार का असल मजा स्कूल के दिनों में ही सबसे ज्यादा मिला | मुझे अब भी पूरे स्वर में ढेर सारे लोगो के साथ सामूहिकता में राष्ट्रगान गाने का मन होता है | कई लोग मल्टीप्लेक्स थियेटर में मूवी के पहले “राष्ट्रगान” को सही नही मानते | मुझे व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रगान की सामूहिकता का सुअवसर जितनी बार, जहाँ भी मिले हर बार भावुक कर जाता है | इस बार भी मैंने अपने स्टाफ को एक दिन पहले डेकोरेशन के लिए कहा है | स्टाफ द्वारा ग्लासेस पर छोटे छोटे तिरंगे क्रॉस करके , तीन रंगों के बैलून सभी तरफ बाँधे जाते है | अपनी तरफ से भरपूर सजाने के बाद स्टाफ फोटो खीच कर मुझे भेजता भी है |मैं हर बार जवाब तो दे देती हूँ …”.nice डेकोरेशन” ..लेकिन फिर भी आज बहुत कुछ अधूरा है | अपनों के साथ पूरी चहल पहल , सड़कों पर उत्साह , बूंदी के लड्डू वाले , प्रभात फेरी और देशभक्ति गीतों वाले 15 अगस्त बहुत बहुत याद आते है | चमचमाते मॉल के सेंट्रल प्लेस की … Guys wish u all very very happy independence day ……स्टाइल में सतही आयोजनों के 15 अगस्त में वो बात कहाँ ?? मैं ढेर सारे लोगो के साथ एक साथ राष्ट्रगान चाहती हूँ | पूरी आवाज़ में आकाश गूँजाना चाहती हूँ .|…भाआआआआरत माता की …..जय …स्वतंत्रता दिवस अमर रहे ।……. ..आप सभी को स्वर्णिम आज़ादी की 71 वी वर्षगाठ की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाओं के साथ … .

 

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