दिल का सुकून –कल्पना खजुरिया , उधमपुर

दिल का सुकून –कल्पना खजुरिया , उधमपुर

कौन छीन सकता है मेरे दिल का सुकुं,

अपने ही गम देने का हुनर रखते हैं।।

वो तो दिल की बदली पे भी हैरां है,

हम तो जां देने का हुनर रखते हैं।।

उसे तिल भर के लिए सोचना पड़ा,

हम कदमों में ज़माना रखने का हुनर रखते हैं।।

हकिकत है ,मुठ्ठी में नही आती दुनिया,

मेरे सपने जहाँ देने का हुनर रखते हैं।।

 

 

 

 

कल्पना

143 Comments

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