कंडाली–नंदनी बर्थवाल नई दिल्ली

कंडाली–नंदनी बर्थवाल नई दिल्ली

उत्तराखंड और हिमाचल में बिच्छू घास का साग चाव से खाया जाता है। उत्तराखंड में इसे कंडाली, काल्डी आला व सिसौण आदि कई नामों से जाना जाता है। यह वही घास है जिसे पहाड़ों में कभी मास्टर जी बच्चों को सुधारने के लिए उपयोग करते थे । हिंदी में इसे बिच्छू घास या बिच्छू बूटी कहते हैं। बिच्छू घास नाम सुनकर रौंगटे खड़े हो जाते हैं , शरीर के किसी अंग को यदि कंडाली छू गयी तो अगले दो दिन तक उस जगह पर झनझनाहट रहेगी , लेकिन धीरे-धीरे स्वत: खत्म भी हो जाती है , इसी कंडाली का साग या काफली यदि एक बार खा लें तो जि़न्दगी भर इसका स्वाद नहीं भूल सकते। इसकी कोंपलों का साग मुख्यत: सर्दियों में ही खाया जाता है क्योकि इसकी तासीर गरम होती है। हिमाचल प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में सर्दियों के मौसम में लोगों की एक पसंदीदा डिश है कंडाली का साग। कई गांवों में इसे ‘भाभरो रा साग’ कहा जाता है।इसे पंजाब के विख्यात सरसों के साग से भी अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक माना जाता है, लेकिन इसका कांबिनेशन मक्की की रोटी के साथ ही बैठता है, जिस तरह ‘सरसों का साग और मक्की की रोटी’ प्रचलित है। सरसों का साग ठंडा होता है, परन्तु भाभर (बिच्छु बूटी) का साग गर्म तासीर का होता है। इसलिए इसे सर्दियों के मौसम में ही खाया जाता हैं। बिच्छु बूटी में आयरन भरपूर मात्रा में होता है। पहाड़ो में कंडाली की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें केवल गहरे हरे रंग के छोटी पत्तियों वाले कंडाली का ही साग बनाने में प्रयोग किया जाता है। महिलाएं शाम के समय एक हाथ में टोकरी और दूसरे हाथ में चिमटा लिए कंडाली चुनने निकलती हैं और चिमटे की मदद से कंडाली की कोमल टहनियां तोड़- तोड़ कर टोकरी में डालती रहती हैं। बाद में उसे आग की लपटों में हल्का झुलसाया जाता है। इससे एक तो इसके कांटे जल जाते हैं और साथ ही साग को एक स्मोकी फ्लेवर भी मिल जाता है। इस अर्द्ध झुलसे कंडाली को फिर मुट्ठीभर चावल के साथ पकाया जाता है और पकने के बाद छोंका लगाया जाता हैं। मक्की की रोटी के साथ खाते समय मक्खन भी हो तो खाने का आनन्द कई गुना बढ़ जाता है। यह सब्जी पहाड़ों पर ही खाई जाती है। सिरमौर जिला में तो हाटी समुदाय को कंडाली के साथ अन्य सन्दर्भों में भी शुमार माना जाता है। जनश्रुतियों के अनुसार जौनसार भाबर का नाम इसी भाभर के पौधे के कारण पड़ा है। खरपतवार की तरह उगने वाले इस भाभर के रेशे भी निकलते हैं, जो रस्सियां बनाने के काम आते हैं।
कंडाली का साग बनाने की विधि : काफली बनाने के लिए कंडाली की नई मुलायम कोपलें उपयुक्त होती है लेकिन मुलायम कोपलें तभी होंगी जब कंडाली के पौधे को हर साल काटते रहेंगे , वरना पुराना पौधा खाने लायक नहीं होता। कोपलें काटकर लाने के लिए चिमटा जरूरी हथियार है। साथ में दो मुहँ वाली डंडी और तेज दरांती। डंडी से कंडाली को दबायें और चिमटे से पकड़ें और फटा -फट दरांती से काटकर टोकरी में रखें। परन्तु सावधानी रखें कंडाली शरीर को न लगे। इन हरी कोपलों को घर लाकर अच्छी तरह झाडक़र साफ़ कर लोहे की कढ़ाही में कम पानी में अच्छी तरह ढक्कन लगाकर पकाएं। साथ में थोडा अमिल्डा की हरी पतियाँ भी पकाएं। अमिल्डा के पत्ते हल्के खट्टे होते हैं , यह स्वाद बढ़ाते हैं और संतुलन भी बनाते है , कई स्थानों में पकाने से पूर्व कंडाली की कोपलों को आग की तेज लौ के सामने के लिए दिखाते हैं तो उसके सुई नुमा तेज रोयें बारूद की तरह जल जाते हैं। ऐसा करने से कंडाली की काफली ज्यादा स्वादिष्ट होती हैं। लेकिन यदि ऐसा भी न करें तब भी कंटीले रोओं का असर पकने से खत्म हो जाता है। इस उबली कंडाली को सिल-बट्टे से पीसें या करछी से अच्छी तरह घोटें और थाली में अलग निकालकर उसमें पानी मिलाकर घोलें। इस घोल में थोडा सा आटा /बेसन या चावल का आलण (चावल की पिटी ) भी अच्छी तरह मिलायें। स्वादानुसार नमक , मिर्च डालें। थोडा सा धनिया पाउडर दाल सकते हैं। तेल गर्म होने पर पहले उसमें जरुरत अनुसार लाल मिर्च भूनना न भूलें , मिर्च भुन कर अलग निकाल दें। अब तडके के लिए उसमें जख्या , चोरा , लहसून या हिंग डालें , और फटाफट कंडाली का घोल उसमें दाल दें , कंडाली की खुशबू से वातावरण महक उठेगा। अब करछी से अच्छी तरह हिलाते या घुमाते रहें ताकि कढ़ाही के टेल पर न जमे। पानी अंदाज का रखें काफली न ज्यादा पतली हो न ज्यादा गाढ़ी। अच्छी तरह पकाएं काफली तैयार है। परोसते समय घी से ज्यादा जायका आता है। और हाँ भूनी पहाड़ी करारी मिर्च भी न भूलें। काफली के साथ मजेदार लगती है – काफली -झंगोरा , काफली -भात और काफली -मंडुवा की रोटी , यह जोरदार रैसिपी है।
कंडाली है खनिज, विटामिन व औषधि का भण्डार : कंडाली में लौह तत्व अत्यधिक होता है। खून की कमी पूरी करती है। इस के अलावा फोरमिक ऐसिड , एसटिल कोलाइट, विटामिन ए भी कंडाली में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसमें चंडी तत्व भी पाया जाता है। गैस नाशक है आसानी से हज्म होती है। कंडाली का खानपान पीलिया, पांडू, उदार रोग, खांसी, जुकाम, बलगम,गठिया रोग, चर्बी कम करने में सहायक है। स्त्री रोग , किडनी अनीमिया , साइटिका हाथ पाँव में मोच आने पर कंडाली रक्त संचारण का काम करती है। कंडाली कैंसर रोधी है, इसके बीजों से कैंसर की दवाई भी बन रही है। एलर्जी खत्म करने में यह रामबाण औषधि है. कंडाली की पतियों को सुखाकर हर्बल चाय तैयार होती है। कंडाली के डंठलों का इस्तेमाल नहाने के साबुन में होता है। छाल के रेशे की टोपी मानसिक संतुलन के लिए उपयोगी है। कंडाली को उबाल कर नमक मिर्च व मसाला मिलकर सूप के रूप में पी सकते हैं। कंडाली के मुलायम डंठल की बाहरी छाल निकालने के बाद डंठल से बच्चों व बड़ों के लिए एनिमा का काम लिया जा सकता हैI

नंदनी बर्थवाल नई दिल्ली

91 Comments

  1. 581183 306534This is the fitting weblog for anybody who desires to find out about this topic. You notice a whole lot its nearly onerous to argue with you (not that I truly would wantHaHa). You undoubtedly put a brand new spin on a subject thats been written about for years. Nice stuff, merely great! 439367

  2. Wow, superb weblog layout! How lengthy have you ever been blogging for?

    you made running a blog look easy. The total
    glance of your web site is magnificent, let alone the content material!

  3. Aw, this was an exceptionally good post. Taking the time and actual effort to generate a good
    article… but what can I say… I put things off a whole
    lot and never seem to get nearly anything done.

  4. Hey there, I think your blog might be having browser compatibility
    issues. When I look at your blog site in Safari, it looks fine but when opening in Internet Explorer, it has some overlapping.

    I just wanted to give you a quick heads up! Other
    then that, amazing blog!

  5. It’s in reality a nice and useful piece of
    information. I am happy that you shared this useful info with us.
    Please keep us up to date like this. Thank you for sharing.

  6. I am curious to find out what blog system you’re utilizing?

    I’m experiencing some small security problems with my latest website and I’d
    like to find something more risk-free. Do you have any suggestions?

  7. I was wondering if you ever thought of changing the layout of your website?
    Its very well written; I love what youve got to say.
    But maybe you could a little more in the way of content so people
    could connect with it better. Youve got an awful lot of text for only having 1 or 2 pictures.

    Maybe you could space it out better?

  8. whoah this blog is fantastic i really like studying your posts.
    Stay up the good work! You realize, lots of persons are hunting around for this information, you could aid them greatly.

  9. Please let me know if you’re looking for a author for your
    weblog. You have some really great posts and I feel I would be a good
    asset. If you ever want to take some of the load off, I’d love to write
    some content for your blog in exchange for a link back to mine.
    Please send me an email if interested. Many
    thanks!

  10. You have made some decent points there. I checked on the web
    for additional information about the issue and found most individuals will go along with your views on this web site.

  11. An impressive share! I’ve just forwarded this onto a co-worker who has been conducting a little homework on this.
    And he actually ordered me dinner simply because I discovered it for him…
    lol. So allow me to reword this…. Thanks for the meal!!
    But yeah, thanks for spending some time to discuss this subject here on your web site.

  12. I like the helpful info you provide in your articles.
    I will bookmark your weblog and check again here
    frequently. I’m quite sure I will learn a lot of new stuff right here!
    Good luck for the next!

  13. Good day! This is my first visit to your blog! We are a
    team of volunteers and starting a new initiative in a community in the same niche.

    Your blog provided us beneficial information to work on. You have done a wonderful job!

    Also visit my web blog – coupon codes (Rosaline)

  14. You are so awesome! I do not suppose I’ve read through something like this before.
    So great to discover another person with some original thoughts on this issue.
    Really.. thank you for starting this up. This website is one thing that is required on the internet,
    someone with a bit of originality!

    Feel free to surf to my page: police exam (Mireya)

  15. Simply wish to say your article is as amazing. The clarity on your
    put up is simply spectacular and that i can suppose you are knowledgeable on this subject.
    Fine along with your permission let me to grab your RSS feed to stay up to date with drawing close post.
    Thank you a million and please keep up the rewarding work. quest bars http://bitly.com/3jZgEA2 quest bars

  16. Generally I do not learn post on blogs, but I wish to
    say that this write-up very pressured me to take a look at and do it!

    Your writing style has been surprised me. Thanks, very nice post.

    Here is my web site; phlebotomy exam (Lee)

  17. I love your blog.. very nice colors & theme. Did you design this website yourself or did you
    hire someone to do it for you? Plz answer back as I’m looking to construct my own blog and would like
    to know where u got this from. many thanks

    My web blog – pmp exam questions (Marisa)

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *