Madhu Film writer

Madhu Film writer
वो पुरुष आज़ाद ख्याल है मगर एक शर्त है,
वो देता है आज़ादी महिलाओं को उड़ान भरने की
वो देता है हौसला आकाश नापने की मगर एक शर्त है
वो करता है एलान औरत की तरक्की का,
हाँ वो पुरुष बहुत आज़ाद ख्याल है मगर एक शर्त है….
आसमा पर दायरों के निशान वो लगाएगा,
बात इतनी है कि पंखों पर कायदों के
तिनकों का फैसला उसका होगा,
आगाज़ के इजाजत की लकीर खिंचेगा,
बुलंदी के पैमानों की ऊँचाई तय करेगा,
ख्वाहिशों की डोर भी हाथ में रखेगा,
वो पुरुष बहुत आजाद ख्याल है मगर एक शर्त है ….
आसमा की ऊँचाई, ठहरने का वक़्त तय कर,
बेरुखी के मांझे से पतंग की दिशा बदलेगा,
उसकी मार्जियों से “तौर ए सफर”
उसके मुताबिक “हद ए मंजिल”
बराबरी के हक़ की वकालत भी करेगा ।
“तुम दिमाग मत चलाया करो”
सोचना कितना है वो सोचेगा ,
काबिलियत की गठरी लिए वो आज़ाद महिला ,
हलक में घुटन का धुँआ भर ,
ख्वाहिशों को हकीकत बनाने,
इजाज़त का इंतज़ार कर रही ।
वो आदमी आज़ाद ख्याल है मगर एक शर्त है…
Madhu _writer at film writer’s association Mumbai

34 Comments

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *