“विदाई”-ममतागैरोला

“विदाई”-ममतागैरोला
कन्यादान हुआ जब पूरा,
आया समय विदाई का ।।
हँसी ख़ुशी सब काम हुआ,
सारी रस्म अदाई का ।

बेटी के उस कातर स्वर ने,
बाबुल को झकझोर दिया ।।
पूछ रही थी पापा तुमने,
क्या सचमुच मुझे छोड़ दिया ।।

अपने आँगन की फुलवारी,
मुझको सदा कहा तुमने ।।
आज उनही हाथों से,
कयों थमाँ दिया तुमनें
उन हाथों को छोड़ नहीं
जाना कही और कहीं और।।
#ममतागैरोला

Mamta Gairola is a social worker, teacher, writer and poet from Baiwadi. Thanks are due to Mamta for her thematic poem.

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