कविता हर माँ पर–रजनी रैना

कविता हर माँ पर–रजनी रैना

जम्मू घुटनो पर रेंगते रेंगते

कब पैरों पर खडॉ हुआ

तेरी ममता की छाव

ना जाने कब में बड़ा हुआ काला टिका,

दूध मलाई आज भी सब कुछ बैसा है

प्यार यह तेरा कैसा है

सीधा साधा भोला भाला

मै ही सब से अच्छा हूँ

कितना भी हो जाऊं बड़ा

“माँ” में आज भी तेरा बच्चा हूँ…..

रजनी रैना, जम्मू

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