तेरा डर –वरुण वीर,उधमपुर जम्मू

◆◆◆◆ तेरा डर ◆◆◆◆

वरुण वीर,उधमपुर जम्मू

कभी कभी किसी
गलतफहमी के शिकार में
उलझ जाते हैं हम दोनों ।
यह जो चेहरे पर तेरे
बेरुखी सी दिखती है
असल में
यह तो तेरा डर है
मुझे खो देने का …
मैं हँसता हूं बस
दर्द को छुपाने के लिए
वरना दिल करता है
तेरी बाहों में लिपट के
खुल के रोना का….
बहुत अरसा हुआ है
मुझे अब सोये हुए
बहुत रातें जाग कर
बीता दी तेरे इंतज़ार में
और अब दिल करता है
मौत के आग़ोश में सोने का …..
बहुत तकलीफ दी तुम्हें,
इस महोब्बत ने दाग
बहुत दिए तेरे दामन पर,
अब मजा ले रहा हूं
आँसुओं से दाग धोने का…
तेरी याद में रोने का ।
ये कैसा डर है
तेरा मुझे खोने का ।
मैं तो तेरे पास हूँ
तेरी सांसों में समाया हुआ ।
जैसे गुलाब में महक होती है
ये कैसा डर है
तेरा मुझे खोने का ।

वरुण वीर

उधमपुर ,जम्मू